जानें किसे नहीं करना चाहिए सूर्य नमस्कार और क्यों !! और साथ ही जानिए सही तरीका भी ... |Surya Namaskar Steps & Precautions






योग सम्पूर्ण  मानव सभ्यता के लिए , हमारे भारतवर्ष देश की एक सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत लाभकारी देंन है ।जिसका यदि हम लाभ उठाएं तो हम अपने शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाये रख सकतें है तथा आज की भाग -दौड़ भरी ज़िन्दगी में होने वाले तनाव बीमारियों आदि से बचे रह सकतें हैं।

आज हम Yoga में  Surya Namskar Steps

detail में जानेंगे और साथ ही साथ यह भी देखेंगें की कही जाने अनजाने कही हम कोई गलती तो नहीं कर रहे इसे करने में ,जिसके कारण हमें कोई नुकसान हो रहा हो। 


SURYA NAMASKAR STEPS AND PRECAUTIONS
SURYA NAMASKAR STEPS AND PRECAUTIONS

 दोस्तों ,योग के सभी आसन बहुत ही लाभकारी होते हैं परन्तु Surya namskar  को सर्वश्रेष्ट आसन कहा गया है ,क्यूंकि प्रतिदिन हम अगर केवल सूर्य नमस्कार का ही अभ्यास कर लें तो ,तो पूरे शरीर की सभी
अगों का अच्छा व्यायाम हो जाता है। और फिर किसी और आसन को करने की ज़्यादा ज़रूरत नहीं रहती।

इसका प्रतिदिन अभ्यास हमें ऊर्जावान ,तेजस्वी, निरोगी  बनता है।  यह एक बहुत ही अच्छा cardio vascular व्यायाम का कार्य करता है और हमारे शरीर के सभी  में अंगों में रक्त के प्रवाह (blood circulation) और Oxygen supply को बढ़ाता है कई प्रकार के रोगों से रक्षा करता है। हमारी आँखों की रौशनी को बढ़ाने ,खून का सही प्रवाह सभी अंगों में करने में मदद करता है।

Surya namskar एक आसन न होकर12  योग आसनों का एक क्रमबद्ध तरीके से किया जाने वाला योग है। जब  इसके 2 चरण किये जाते हैं तब पूर्ण सूर्य नमस्कार पूरा होता है

मेरे कहने का अर्थ है पहले हम दाहिने पैर से शुरू करके सूर्य नमस्कार के 12 आसनों को करते हैं ,तब इससे अर्ध सूर्य नमस्कार कहा जाता है ,और जब हम बाएं पैर से पुनः उन १२ आसनों को दुहरातें हैं तब पूर्ण सूर्य नमस्कार  माना जाता है।

अर्थात 1 round सूर्य नमस्कार तब पूरा होता है जब हम १२ योग आसान right leg से, 12 योग आसान left  leg से कर लेते हैं।

सूर्य नमस्कार के कई अलग अलग प्रकार या variations  भी पाए जातें है पर किसी एक को ही तिरंतर अभ्यास में लाना बेहतर विकल्प है।

Surya Namskar Mantra भी होते हैं जिनको आप सीख कर यदि करते हैं तो और अधिक लाभ भी ले सकतें हैं Surya Namaskar Steps से।

और भी पढ़ें : सूर्य नमस्कार मंत्र | Surya Namskar Mantra


किसी भी योग करते वक़्त  कुछ सावधनियां बरतना जरुरी होता है  उसी प्रकार सूर्य नमस्कार के दौरान भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है। उन सावधानियों के बारे में बात करने से पहले चलिए Surya Namaskar Steps के बारे में जान लेते हैं।


Name of 12  Asanas of Surya Namaskar Steps in hindi-सूर्य नमस्कार स्टेप्स के १२ आसनों के नाम  :


  1. प्रणाम आसन | Prayer pose
  2. हस्तउत्तानासन |Raised Arms pose
  3. पाद-हस्तानसन /हस्तपाद आसन |Hand to Foot pose 
  4. अश्व संचालन आसन | Equestrian pose
  5. दंडासन |Dandasan (Stick pose)
  6. अष्टांग नमस्कार | Ashtang Namaskar 
  7. भुजंग आसन |Bhujangasana (Cobra pose)
  8. पर्वत आसन | Parvatasana (Mountain pose)
  9. अश्वसंचालन आसन | Ashwa Sanchalanasana (Equestrian pose)
  10. हस्तपाद आसन | Hasta Padasana (Hand to Foot pose)
  11. हस्तउत्थान आसन | Hastauttanasana (Raised Arms pose)
  12. ताड़ासन | Tadasana 





Surya Namaskar Steps in hindi -सूर्य नमस्कार स्टेप्स    :




1. प्रणाम आसन | Prayer pose:



 Surya Namaskar Steps  ,yoga
               प्रणाम आसन 



सूर्य नमस्कार का प्रारम्भ प्रणाम आसन से किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले अपने योग मैट पर एक कोने में सीधे सावधान की मुद्रा में surya namaskar steps दोनों पैरों के तलवों  को आपस में जोड़कर खड़े हो जाएं।

फिर अपनी आँखों को बंद करके तथा मन को शांत और एकाग्र चित  करके अपने कन्धों को ढीला छोड़ें। अब सांस भरते हुए दोनों हाथो को उठाकर सामने लाये और सांस छोड़ते हुए हथेलियों को आपस में जोड़कर अपनी छाती या वक्षस्थल के सामने नमस्कार मुद्रा में लाएं। ये कहलाता है , प्रणाम आसन।


2.हस्तउत्तानासन |Raised Arms pose:

                                                
 Surya Namaskar Steps  -precautions,Yoga
हस्तउत्तानासन




अब सांस छोटे हुए धीरे धीरे आगे की और झुकना है। इस दौरान आपको रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधा रखना है और घुटनो को भी सीधा रखने की कोशिश करनी है।

यदि ज़्यादा असुविधा लगे तो घुटनो को थोड़ा सा मोड़  भी सकतें हैं। 
पूरी तरह से साँसों को छोड़ते हुए हाथों के पंजो को पैरों के समीप रखें। 
इसी स्तिथि को कहा जाता है, पाद-हस्तानसन।

3.पाद-हस्तानसन /हस्तपाद आसन |Hand to Foot pose :
 Surya Namaskar Steps  ,Yoga
पाद-हस्तानसन





अब सांस छोटे हुए धीरे धीरे आगे की और झुकना है। इस दौरान आपको रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधा रखना है और घुटनो को भी सीधा रखने की कोशिश करनी है। 
यदि ज़्यादा असुविधा लगे तो घुटनो को थोड़ा सा मोड़  भी सकतें हैं। 
पूरी तरह से साँसों को छोड़ते हुए हाथों के पंजो को पैरों के समीप रखें। 
इसी स्तिथि को कहा जाता है, पाद-हस्तानसन।



अश्व संचालन आसन | Equestrian pose:

  
 Surya Namaskar Steps ,yoga
अश्व संचालन


अब पाद-हस्तानसन की स्तिथि में हथेलिओं को ज़मीन पर रखकर सांस लेते हुए सबसे पहले अपने दाएं पैर को पीछे जितना हो सके ले जाएं और सीधा रखे तथा बाएं घुटने को मूडे  हुए दोने भुजाओं के बीच में रखें। साथ ही साथ चेहरा आकाश की और ऊपर रखे और जितने संभव हो उतना पीछे देखने की कोशिश करें।यही स्तिथि कहलाती है, अश्व संचालन आसन ।





5.दंडासन |Dandasan (Stick pose):


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दंडासन

अश्व संचालन आसन के बाद सांस अंदर लेते हुए बाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और शरीर को एक सीढ़ी रेखा में रखे। दोनों एड़ियों को आपस में सटाकर रखें। यह स्तिथि कहलाती है दण्डासन।



6.अष्टांग नमस्कार | Ashtang Namaskar

 Surya Namaskar Steps ,yoga
अष्टांग नमस्कार


अब धीरे-धीरे दोनों घुटनों को जमीन पर लाएं  और सांस  को भी धीरे-धीरे बाहर निकालें। इसके बाद अपने नितम्ब या hips को जमीन से थोड़ा ऊपर उठाएं और बाकी शरीर को आगे की ओर खिसकाकर आगे लाना  है।


इस स्थिति में अपनी कहानियों को थोड़ा ऊपर ही रखना है परंतु छाती , दोनों हथेलियां,और थोड़ी (ठुड्डी /chin ) यह भूमि से स्पर्श करती रहेंगी , ऐसी स्थिति को ही कहते हैं अष्टांग नमस्कार


क्योंकि इसमें 8 अंग जिसमें कि दोनों पैरों की उंगलियां, दोनों घुटने ,दोनों हथेलियां ,छाती और ठुड्डी /chin यह आठों अंग ज़मीन को स्पर्श करते हैं।


7.भुजंग आसन |Bhujangasana (Cobra pose):





 Surya Namaskar Steps ,yoga
भुजंग आसन

              

इस आसन में हम नितम्ब को ज़मीन पर रखेंगें और पेट भी ज़मीन को स्पर्श करेगा। तथा अपनी हाथों की कोहनियों को सीधा करते हुए कमर से आगे का भाग उपर उठाएंगें और सर को भी पीछे की तरफ तानते हुए ऊपर देखेंगें यह स्तिथि भुजंग यानी की cobra से मिलती जुलती लगती है दोनों पैरों को आपस में जोड़कर रखेंगें। कोहनिया हलकी मुडी़ भी रह सकती हैं।



8.पर्वत आसन | Parvatasana (Mountain pose):

 Surya Namaskar Steps ,yoga
पर्वत आसन



अब पैरों को एक साथ रखते हुए नितम्ब और रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से को जितना ऊपर उठा सकते हैं उठाएं और हथेलिओं को ज़मीन पर रखें तथा सर को निचे की तरफ झुका कर रखें। एड़ियों को ज़मीन रखने का प्रयास करें। ऐसे में उलटे (^ )जैसी स्तिथि दिखेगी जिसे पर्वत आसान भी कहतें हैं।





9.अश्वसंचालन आसन | AshwaSanchalanasana (Equestrian pose):

 Surya Namaskar Steps ,yoga
अश्वसंचालन आसन

अब हुए  सांस छोड़ते अपने दाहिने पैर को आगे दोनों हाथों के बीच लेकर आएं। बायाँ घुटना ज़मीन को छू  सकता है और पैर सीधा रहेगा। सर और चेहरा ऊपर की तरफ रखें और पीछे देखने का प्रयत्न करें।


10.हस्तपाद आसन | Hasta Padasana (Hand to Foot pose)
 Surya Namaskar Steps  ,yoga
हस्तपाद आसन

सांस छोड़ते हुए बाए पैर को धीरे से आगे लाये और हथेलिओं को ज़मीन पर लगाकर रखें और सर नीचे की तरफ रहेगा और घुटनों को थोड़ा मुदा भी रहने दे सकतें हैं। अगर संभव हो तो अपनी नाक को घुटनो से छूने का प्रयत्न कर सकतें हैं।


11.हस्त उत्थान आसन | Hastauttanasana (Raised Arms pose):
 Surya Namaskar Steps  ,yoga
हस्त उत्थान आसन 


यह  स्तिथि दूसरी स्तिथि के सामान ही है। इसमें धीरे धीरे सांस लेते हुए रीढ़ की हड्डी को बिना झटके लगाए सीधा करना है और हाथों को पीछे की तरफ लेकर जाना है। दोनों हाथ कानों को स्पर्श 
करेंगे और खीचाव ऊपर की और महसूस करें। 

12.प्रणाम आसान | Pranam Asana :


 Surya Namaskar Steps ,yoga

प्रणाम आसान 





इसमें पहली स्तिथि के जैसे दोनों हाटों को सामने लेकर प्रणाम की मुद्रा को बनायें। और फिर धीरे से हाथों को निचे ले आएं।





Note :


यह अभी अर्ध सूर्य नमस्कार हुआ है। यही प्रक्रिया अब बाएं पैर से शुरू करनी है और 12 आसन बाएं पैर से भी करने हैं तब आपका 1 round surya namskar पूरा होगा।



सूर्य नमस्कार करते समय अगर इन बातों का ध्यान रखा जाये तो ये और भी प्रभावशाली हो जाता है :

  • हमेशा खुली,हवादार जगह पर सूर्य नमस्कार का अभ्यास करें।
  • Surya namskar के पूर्व हल्का warm-up कर लें।
  • Surya namskar को करने का सबसे अच्छा व् उत्तम समय तो सुबह सूर्योदय के समय होता है। सूर्य के सामने यदि आप Surya namskar को करते हैं ये आपको अत्यधिक ऊर्जा प्रदान करता है। 
  • यदि सुबह आप Surya namskar का अभ्यास नहीं कर पा रहे तो शाम का समय भी उत्तम है। अन्यथा दिन में भी किया जा सकता है।
  • यदि आप सुबह  या दिन में इसका अभ्यास कर रहे है तो पूर्व की दिशा की और मुँह करके करें।
  • पर यदि शाम को कर रहे हैं तो पश्चिम की तरफ अपना मुँह रखें।
  • Surya namskar हमेशा खाली पेट करना चाहिये।
  • Surya namskar के दौरान ढीले और आरामदायक कपड़ें ही पहनें।
  • Surya namskar के समय या तो ज़मीन पर yoga mat पतली चद्दर या किसी अन्य पतले गद्दे का प्रयोग करें। आप इसको घास पर भी  कर सकते हैं।
  • एक आसान से दूसरे आसन की स्तिथि में बड़ी ही सहजता के साथ आएं ना कि झटके देते हुए।
  • Surya namskar के पूर्ण हो जाने के बाद कुछ देर शव-आसन /ShavaAsana करें जब तक सांसें फिर से सामन्य जाएं।

कहीं ये गलतियां आप भी तो नहीं कर रहे ?? इन बातों का रखें विशेष ध्यान Suryanamskar Steps के दौरान /Precautions 


यदि आप Surya namskar और योग करते हैं तो कुछ का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। कुछ लोग इन बातों की  हैं  जिससे उन्हें नुक्सान भी हो जाता है। इसलिए में आपको सलाह दूँगी की Surya namskar और योग ज़रूर करें और इसका लाभ लें परन्तु कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें जिससे की आपको किसी नुक्सान को न झेलना पड़े। 


1. नियमित अभ्यास न करना :

ज़रूरी है की आप Surya namskar steps अच्छे से  सीख कर नियमित रूप से इसका अभ्यास करें। क्यूंकि जब आप रोज़ इसका अभ्यास करेंगे तो आपका शरीर अधिक लचीला होता  दिन -प्रतिदिन आप और भी बेहतर ढंग से इसको कर पायेंगें। 

कुछ लोग की आदत होती है कि , जब मन हुआ तब कर लिया कभी नहीं किया परन्तु ऐस करना गलत है क्यूंकि ,Surya namskar steps में कुछ ऐसे आसान भी है जो आप नियमित नहीं करेंगें तो आप शरीर की flexibility की कमी के कारन ठीक से नहीं कर पायेंगें और जिससे muscle strain/sprain होने का भी खतरा रहता है। 

  2.  शारीरिक  क्षमता से अधिक प्रयास करना :

इस बात को समझना ज़रूरी है की योग या Surya namskar करते समय हमें अपने शरीर की क्षमता के अनुरूप ही सभी स्टेप्स को करना चाहिए। 

अत्यधिक प्रयत्न या खिचाव का प्रयास भूल कर भी न करें। योग शरीर को सहज बनाने और relax करने की पद्विति है।

 यह सच है की जब शुरू में योग या Surya namskar steps प्रारम्भ करेंगे तो शरीर में हलका -फुल्का दर्द या खिचाव होगा परन्तु  नियमित अभ्यास के बाद ये भी दूर हो जायेगा। हमेशा धीरे- धीरे बिना झटके के ही योग करें। 


3.सांस की गति पर ध्यान केंद्रित रखना :

योग का कोई भी अन्य आसन हो या Surya namskar steps इस बात पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है  साँसों के प्रति जागरूक रहे। योग का  होता है शरीर ,मन और सांस का एक होना या  योग होना।

योग के दौरान जब आप अपनी साँसों के प्रति ध्यान केंद्रित रखेंगे और लम्बी- गहरी सांस लेंगें तब आपकी समस्त मासपेशियों /muscles में oxygen का प्रवाह बढेगा तथा समस्त कोशिकाओं / cells में oxygen पहुँच कर शरीर से toxins को बाहर निकालने में मदद करेगी। 

साथ ही साथ आपका मन भी शांत और केंद्रित होता जायेगा   जिससे की आप अपने को तनाव से भी मुक्त पायेंगें। 

4.भरे पेट योग या Surya namskar steps करना :

कोई भी योग हो या Surya namskar steps ये बेहद ज़रूरी है की आप इन्हे खाली पेट  करें। क्यूंकि खाना खाने के बाद आप आसनों को ठीक प्रकार से नहीं कर पायेंगें और खाने के बाद शरीर का maximum blood circulation  उस समय आपके पेट की muscles में रहता है जिससे की योग करने पर शरीर की बाकी muscles को सही मात्रा में blood और  oxygen की आपूर्ति नहीं हो पायेगी और दर्द का कारन भी बन जाएगी। इससे आपको 
digestive system /पाचन तंत्र सम्बंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। 

5..पानी का सेवन योग या Surya namskar steps  के दौरान न करें :


जब हम  योग या Surya namskar steps  तब हमारे शरीर में blood सर्कुलेशन बढ़ता है और ऊर्जा का संचार होता है साथ ही साथ शरीर का temperature /तापमान भी बढ़ता है ऐसे में बीच बीच में पानी  पीने से परहेज़ करना चाहिए। 

6.झटकों के साथ या बहुत जल्दी- जल्दी करना :

कुछ लोग आदत अनुसार या समय की कमी के कारण बहुत जल्दी जल्दी या फिर झटके देकर surya namskar steps को करते हैं।  या फिर surya namskar steps के सही जानकारी न होने के कारण अलग-अलग स्टेप्स में कुछ गलतियां करते है जिनसे शरीर को नुक्सान भी पहुंच सकता है जैसे कि  रीढ़ की हड्डी को सीधा न रखना।

झटके से एक स्तिथि से दूसरी स्तिथि में जाने से spine को  नुक्सान पहुंच  सकता है और  Low back pain की समस्या हो सकती है। भुजंग आसन में उतना ही ऊपर उठे जितना आसानी से कर पा रहे हों।




सूर्य नमस्कार इन परिस्थितयों  में बिलकुल न करें या डॉक्टर की सलाह अवश्य लें Contraindications for Surya Namsakaar:


i) शारीरिक दुर्बलता /Body weakness :

यदि किसी लम्बी बिमारी या chronic disease या फिर हड्डियों की दुर्बलता /bone weakness के कारन शरीर में कमजोरी रहती हो  स्तिथि में surya namskar steps ना करें ,अपने डॉक्टर का परामर्श बहुत ही ज़रूरी है ऐसी स्तिथि में।

ii) हृदय -सम्बंधित बिमारियों में /Heart Problems  & Diseases:
    

हृदय -सम्बंधित  गंभीर बिमारियों में surya namskar steps नहीं करने चाहिए। यदि आप बिमारी के पूर्व में इसको करते थे और फिर करने की सोच रहे है तो याद रखिये की आपके Doctor की सहमति बहुत ही ज़रूरी है इससे फिर से करने के लिए अन्यथा आपको परेशानी का सामना करना पद सकता है।

और अगर आपका डॉक्टर फिर से surya namskar steps करने की इज़्ज़ज़त  दे देता है तो कोशिश करें की किसी yoga instructor की देख रेख में ही आप  इससे करें।

iii)उच्च रक्क्त चाप /High B.P :

यदि आप high b.p से ग्रसित हैं तो भी आपको suryanamskar steps बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करने चाहियें।

आपकी उम्र ज़्यादा नहीं तो है तो ऐसी condition में आप doctor से पूछ कर बड़े ही आराम से धीरे- धीरे suryanamskar steps के थोड़े ही rounds ही करें। इसमें बिलकुल भी ज़ल्दबाज़ी या हड़बड़ी न करें।


iv) मेरुदण्ड सम्बंधित बिमारियों या  पीठ दर्द /Spine Disorders or Low Back Pain:

यदि आपके मेरुदंड में किसी प्रकार की बीमारी हो या किसी चोट या अन्य किसी कारण से Low back pain हो तो ऐसी स्तिथि में surya namskar steps को न करें। 

क्यूंकि इससे करने में रीढ़ की हड्डी में खिचाव आता है जिससे आपको दर्द और परेशानी हो सकती है।

यदि किसी injury के कारन Low back pain की समस्या हुई हो और कई दिन बीत चुके हों ,तो अपने Doctor की सलाह पर धीरे-धीरे इसका अभ्यास शुरू करें।


v) प्रेग्नेंट औरतें /Pregnant Women:

Surya namskar steps में spine और abdomen में खिचाव और pressure पड़ता है ,इसलिए Pregnant  औरतों को इसे नहीं करना चाहिए।
डिलीवरी /Delivery के 40 दिनों के बाद से आप पेट की चर्बी को काम करने के लिए सूर्य नमस्कार शुरू कर सकती हैं। 

vi) माहवारी/Menstruation :

Periods  के दौरान महिलाओं को surya namskar  नहीं करना चाहिये क्यूंकि उस दौरान शरीर को किसी भी प्रकार के श्रम करने से बचना चाहिए।

vii) बुख़ार या बिमारी के समय /During Fever or illness:

क्यूंकि ऐसे समय में शरीर दुर्बल रहता है तो,अधिक श्रम करना सही 
नहीं होता।

viii) गठिया /Arthiritis  & Swollen Joints:

यदि किसी व्यक्ति को arthritis या जोड़ों में सूजन की शिकायत है या घुटनों /knee में दिक्कत है तो ऐसी स्तीथि में भी सूर्य नमस्कार न करें या बहुत ही आराम से किसी प्रशिक्षक की मौजूदगी में ही करें।

ix) कलाई की चोट /Wrist -Injury :

Surya namskar steps में कलाई।/wrist के ऊपर भार आता है इसलिए कलाई की चोट के दौरान आप सूर्य नमस्कार न करें। 

तो देखा आप सबने Surya namskar steps बहुत ही आसान है करने में यदि, इन्हें किसी योग्य प्रशिक्षक से सही ढ़गं से सीख कर आप अपनी दिनचर्या का अंग बना लेते हैं तो आप खुद ही मह्सूस करेंगे की आपमें एक नई ऊर्जा और शक्ति के संचार के साथ -साथ तनाव से मुक्ति भी मिल रही है।

बस कुछ सावधानियां जिनके बारे में मैने आपको बताया है उनका ध्यान ज़रूर रखें जिससे की आपको Surya Namaskar के फ़ायदे तो हों, परन्तु किसी लापरवाही के कारन कोई नुक्सान न हो।


आपको लेख अच्छा लगा तो अपने Family, friends आदि के साथ ज़रूर share करें। और यदि आप कुछ पूछना चाहतें हैं तो Comment box  में अपना Question  डालें।
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