All About Osteoporosis-Causes, Symptoms, Prevention, and Treatment


क्या आप जानते हैं ??? बीते कुछ वर्षों में Osteoporosis नामक हड्डी की बीमारी जिसे -Silent Killer भी कहतें हैं दुनिया भर में चुपचाप लाखों लोगों को अपनी गिरफत में ले चुकी है, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, उन्नत विकसित देशों / developed countries में लगभग 75 मिलियन लोग Osteoporosis से पीड़ित हैं। 

संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 मिलियन ज्ञात मामले हैं ।

Osteoporosis हड्डियों / bones की एक बीमारी है, जिसमें हड्डियाँ कमजोर हो जाती है और आसानी से टूट जाती है।

Osteoporosis ज्यादातर बुजुर्ग महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन इसकी रोकथाम तो कम उम्र से ही शुरू की जानी चाहिए ।


आपकी उम्र चाहे कितनी भी हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आप हड्डी के द्रव्यमान/ bone mass को बनाने और हड्डी के नुकसान को रोकने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं।

Osteoporosis के कारण हड्डियों का टूटना, बड़ी उम्रदराज़ महिलाओं में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और अक्षमता के एक अहम कारण के रूप में देखने को मिलता है।

"Osteoporosis-Causes,Symptoms, Prevention and Treatment"



ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ ख़ास तथ्य (Key Facts About Osteoporosis in Hindi):


Osteoporosis के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य नीचे दिए गए हैं। विस्तार से सभी तथ्यों को आगे दिया गया है :



*ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की संरचना और ताकत को प्रभावित करता है और विशेष रूप से रीढ़, कूल्हे
  और कलाई में फ्रैक्चर को अधिक संभावना बनाता है।

*रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में यह सबसे आम है,लेकिन धूम्रपान और खराब आहार जोखिम को  बढ़ाता है।

*अक्सर स्पष्ट रूप से कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं,लेकिन  रीढ़ की हड्डी की कमजोरी हो सकती है, जिससे हड्डी का दर्द /bone pain हो सकता है।

*DEXA के नाम से जाना जाना जाने वाला एक विशेष एक्स-रे-आधारित स्कैन का उपयोग इसके निदान के लिए किया जाता है।

*Osteoporosis  के उपचार में हड्डी के नुकसान को रोकने या धीमा करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। 



*इसके अतिरिक्त Calcium, Magnesium और Vitamin D सहित, व्यायाम/exercise और आहार समायोजन/  

proper diet शामिल हैं।


ऑस्टिओपोरोसिस क्या होता है? (What Is Osteoporosis In Hindi?)


Osteoporosis हड्डियों की एक बीमारी है। 

Osteoporosis के मरीज़ों में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, हड्डी के ऊतकों/tissue में सूक्ष्मदर्शी गिरावट आ जाती है और जिससे कि ऐसे लोगों में हड्डियां आसानी से fracture/ टूट जाती हैं।

Osteoporosis को "मूक बीमारी / silent disease " कहा जाता है। क्यूंकि सामन्यतः इसके लक्षण जल्दी देखने को नहीं मिलते।

Osteoporosis की बीमारी के ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि मरीज़ कई वर्षों से इससे पीड़ित रहता है।

परन्तु इस बात का पता तब चल पाता है जब, कभी हलके से झटके मात्र से या फिर गिर जाने पर हड्डी बड़ी ही आसानी से टूट जाती है।

Osteoporosis में मुख्यतः कूल्हे की हड्डी ,रीढ़ की हड्डी और कलाई का फ्रैक्चर देखने को मिलता है।

ऐसे मरीज़ों में सामान्य गतिविधियों जैसे चलने-फिरने आदि में भी यदि तेज़ झटका आदि लग जाये तो भी बड़ी ही आसानी से फ्रैक्चर/fracture हो जाता है।

Osteoporosis में टूटी हुई हड्डी गंभीर दर्द और अक्षमता का कारण बन सकती है। यह चलने जैसे अपने दैनिक कार्यों को करना कठिन बना सकती है

हड्डी की कमी क्या है?( What Is Bone Loss In Hindi):


Osteoporosis-Causes, Symptoms, Prevention, Treatment
Osteoporosis-Causes, Symptoms, Prevention, Treatment 

हमारी हड्डियां कैल्शियम, फॉस्फोरस और प्रोटीन के अलावा कई प्रकार के मिनरल्स से बनी होती हैं।

लेकिन अनियमित जीवनशैली और बढ़ती उम्र के साथ ये मिनरल नष्ट होने लगते हैं, जिस वजह से हड्डियों का घनत्व या bone density कम होने लगती है और वे कमजोर होने लगती हैं।

हड्डी के  नुकसान/ bone loss में शरीर, Calcium जैसे खनिजों को हमारी हड्डियों से अवशोषित करने लगता है।
जिसके फलस्वरूप bone mass कम हो जाता है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।


Bone loss के कुछ सबसे आम कारण इस प्रकार हैं:






1) भोजन से पर्याप्त मात्रा में Calcium नहीं मिलना -

हमारा शरीर स्वस्थ हड्डियों और दांतों के निर्माण करने के लिए Calcium का उपयोग करता है और साथ ही साथ Calcium को हड्डियों में store करता है।

शरीर में Calcium का उपयोग अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी किया जाता है जैसे कि-

*तंत्रिका तंत्र के माध्यम से संदेश भेजने के लिए

*मांसपेशियों के संकुचन/contraction में मदद करने के लिए

*दिल की लय / heart's rhythm को नियंत्रित करने के लिए




लेकिन Calcium हमारे शरीर नहीं बनता है, इसकी आपूर्ति भोजन से की जानी आवश्यक होती है।

यदि हर दिन पर्याप्त मात्रा Calcium नहीं मिलता है, तो शरीर Calcium को आपकी हड्डियों से अवशोषित करने लगता है ।

जैसे-जैसे इंसान की उम्र बढ़ती जाती है, नई हड्डियों के निर्माण में भी कमी आने लगती है,और पर्याप्त नई हड्डी नहीं बना पाती हैं।

शरीर की जरूरतों को पूरा करने के लिए आपकी हड्डियों से लिया गया Calcium आपको हड्डी के घनत्व को कम कर देता है।

2) महिलाओं में रजोनिवृत्ति के उपरान्त -

महिलाओं में Estrogen hormone हड्डी की density को सही बनाए रखने में बहुत अहम भूमिका निभाता है।


रजोनिवृत्ति /menopause के बाद Estrogen hormone में कमी आ जाती है,जिसके कारण हड्डीयाँ कमजोर,और भंगुर होने लगती हैं और इसके कारण osteoporosis  का खतरा बढ़ जाता है महिलाओं में।


ऑस्टियोपोरोसिस के कारण (Causes And Reasons Of Osteoporosis In Hindi):

Osteoporosis Causes की अगर बात की जाये तो इस बीमारी के कई कारण होते हैं।




*कुछ ऐसे कारण होते हैं जिनको हम चाहकर भी बदल नहीं सकते 

जैसे की-वंशानुगत,लिंग, बढ़ती हुई उम्र, रजोनिवृति के बाद हारमोंस का कम होना आदि।

*वहीं कुछ ऐसे भी कारण हैं, जिनमें हम अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर osteoporosis के खतरे से बच सकते हैं या कम कर सकते हैं

जैसे कि-संतुलित भोजन लेना, व्यसनों को छोड़ना,व्यायाम आदि।

चलिए एक-एक करके इन सभी कारणों को विस्तार से जान लेते हैं:

* वंशानुगत-(Hereditary)

जिन लोगों के परिवार में Osteoporosis की बीमारी का इतिहास मिलता है या उनके माता-पिता में से कोई इस बीमारी से ग्रसित रहा हो तो ऐसे बच्चों में आगे चलकर Osteoporosis के होने का खतरा बढ़ जाता है।


* लिंग-(Gender) 

पुरूषों की तुलना में महिलाओं में Osteoporosis के होने की सम्भावना अधिक होती है।

महिलाओं में हड्डियां छोटी,पतली और कम घनत्व वाली होती हैं।

महिलाओं में bone density काफी हद तक estrogen नामक फीमेल हॉर्मोन/female hormone पर निर्भर करती है।

Estrogen hormone हड्डियों की density को बढा़ने में मदद करता है।




* बढ़ती उम्र-(Ageing)

उम्र के बढ़ने के साथ साथ नयी हड्डियों का बनना कम हो जाता है और साथ ही साथ calcium की कमी भी होने लगती है और हड्डियों का घनत्व/bone density कम होने लगती है।

* जीवन शैली -(Lifestyle)

जो व्यक्ति निष्क्रिय जीवनशैली अपनाते हैं,आरामपसंद होते हैं तथा व्यायाम/exercise आदि नहीं करते, उनमें Osteoporosis का ज्यादा खतरा देखने को मिलता है।

* असंतुलित भोजन-(Unbalanced Diet)

यदि व्यक्ति संतुलित भोजन नहीं लेता अर्थात उसमें सही मात्रा में प्रोटीन/protein, कैल्शियम और विटामिन D आदि मौज़ूद नहीं होते हैं 

तो ऐसी परिस्थिती में शरीर इनकी आपूर्ति पूरी करने के लिए हमारी हड्डियों में से कैल्शियम आदि अवशोषित करने लगता है,जिससे कि Osteoporosis का खतरा बढ़ जाता है ।
               
                                        
* वजन -(Weight)

यदि किसी व्यक्ति का वजन सामन्य से कम होता है, तो कुपोषण के कारण ऐसे व्यक्ति में Osteoporosis का खतरा अधिक होता है।

* होर्मोनेस -(Hormones)

महिलाओं में पाए जाने वाले हॉर्मोन एस्ट्रोजन / estrogen तथा पुरूषों में टेस्टोस्टेरोन / testosteron hormone की कमी होने पर भी Osteoporosis का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।

ये दोनों होर्मोनेस हड्डियों के घनत्व को बनाये रखने में मददगार होते हैं।




* महिलाओं में मासिक धर्म का बंद हो जाना -(Menopause)

महिलाओं में मासिक धर्म बंद होने के बाद Osteoporosis का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि उनमे रजोनिवृत्ति के ovaries द्वारा estrogen हॉर्मोन का स्त्राव कम हो जाता है।

जिन महिलाओं मे मासिक धर्म जल्दी बंद हो जाता है उनमे और भी अधिक खतरा देखा गया है ऑस्टियोपोरोसि होने का।




* व्यसन -(Addiction)

किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन जैसे की धूम्रपान, शराब आदि का सेवन करना Osteoporosis के लिए एक अहम् कारण होते हैं।



 क्यूंकि ऐसे व्यक्तियों में calcium की कमी देखनेको मिलती हैं जिससे की हड्डियों की कमजोरी एक आम समस्या होती है नशा करने वाले व्यक्ति में।

* बीमारियां -(Diseases)

जिन लोगों में थाइरोइड ,डायबिटीज ,किडनी ,तथा हड्डियों की अन्य बीमारियाँ देखने को मिलती है उनमें भी Osteoporosis का खतरा अधिक देखा गया है।


* दवाइयों का सेवन -(Side Effects of Medication)

यदि किसी बीमारी के चलते कोई व्यक्ति कई दिनों तक steroid का सेवन करता  उसमे Osteoporosis के
होने की सम्भावना काफी हद तक बढ़ जाती है।



ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण (Symptoms Of Osteoporosis In Hindi):


अगर देखा जाये तो शुरुवाती दिनों में Osteoporosis के कोई ख़ास लक्षण देखने को नहीं मिलते हैं, ज्यादातर   इस बिमारी का पता तब चलता है जब हलकी फुल्की चोट या गिरने से ही बड़ी आसानी से फ्रैक्चर हो जाता है।

कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन पर यदि सही समय पर ध्यान दे दिया जाये और डॉक्टर से मिलकर सलाह लेकर और जांच करा ली जाये तो,Osteoporosis का पता जल्द लग सकता है और इससे होने वाली जटिलताओं से और हड्डी के टूटने जैसी समस्याओं से बच सकते हैं।


* लम्बाई का कम होना -

रीढ़ की हड्डी में होने वाले फ्रैक्चर के कारण धीरे-धीरे सकुंचन पैदा होता जाता है जो कि,ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज़ों की लम्बाई को प्रभावित करता है।

मरीज़ की लम्बाई पहले की तुलना में कम हो जाती है।



यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण लक्षण है इस बीमारी का।


Osteoporosis-Causes, Symptoms, Prevention and Treatment
Osteoporosis- Symptoms



* गर्दन या पीठ में दर्द-

Osteoporosis के मरीज़ों में गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत देखने को मिलती है।

हड्डियों के घनत्व कम होने की वजह से रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होते रहते हैं जिनके कारन ये दर्द की स्थिति उत्पन्न होती है।


* कमर या पीठ का झुकना- 

रीढ़ की हड्डी में संकुचन के कारन ऐसे मरीज़ की लम्बाई कम होने के साथ-साथ ऊपरी भाग में थोड़ा झुकाव  देखने को मिलता है।

इस झुकाव की अवस्था के कारण गर्दन में दर्द और फेफड़ों के ठीक प्रकार से expand /विस्तार करने में कठनाई होती है ।
जिसके फलस्वरूप ऐसे मरीज़ों में सांस लेने में दिक्कत आने लगती है।




* आसानी से हड्डी का टूटना -

Osteoporosis का सबसे आम लक्षण यही है, ज्यादातर लोगों को इस बिमारी चलता ही तब है जब बड़ी ही आसानी से अपने नित्य कर्मों के दौरान जैसे कि खांसने,चीकने,हलके फुल्के-झटके लगने आदि से हड्डियों का  फ्रैक्चर हो जाता है।




* हाथ से पकडने की क्षमता में कमी आना -
शोधकर्ता ऐसा मानते हैं कि हड्डियों की कमजोरी का एक बहुत बड़ा लक्षण होता है,हाथों के पकड़ने की क्षमता में कमी का आना।




* जल्द थकावट का होना -

जब शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती है तब हड्डियों के साथ साथ हमरी मांसपेशियों में भी कमजोरी देखने को मिलती है।

ऐसी स्तिथि में ज़रा से काम में मरीज़ को थकावट का अभाव होने लगता है।




* शरीर में अक्सर दर्द रहना -

शरीर में अक्सर दर्द का होना, ख़ास तौर पर सुबह उठने पर भी दर्द का रहना लक्षण है हड्डियों की कमजोरी का।




* मसूढ़ों का ढीलापन -

यदि हमारी हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है तो दांतों  के आस पास  की हड्डियों पर भी प्रभाव पड़ता है  और दांत हिलने लगते हैं।

ऐसे में अपने dentist से मिलकर अपने  जबड़ों की हड्डी की density की जांच अवश्य कराएं।


Osteoporosis की जाँच (Diagnosis of  Osteoporosis In Hindi):


यदि आपके डॉक्टर को आपमें ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण लगते हैं तो इसके निदान हेतु वह कई प्रकार की जांचों को कराकर आपका इलाज़ कर सकता है।

चलिए देख लेते हैं कि Osteoporosis के निदान के लिए कौन-कौन से जाँचें की जाती हैं :


1) DEXA Scan / Bone Mineral Density Test :



 डेक्सा/DEXA Scan ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रैक्चर की संभावना को इंगित कर सकता है। 



साथ ही साथ यह उपचार के प्रति  शरीर की प्रतिक्रिया की निगरानी में भी मदद कर सकता है।


परीक्षण के परिणाम DEXA  T-score या Z -score के रूप में दिए जाते हैं।



  Category and T-score range:

      Normal                                                                  T-score ≥ −1.0
       Osteopenia                                                           −2.5 < T-score < −1.0

       Osteoporosis                                                           T-score ≤ −2.5
      Severe osteoporosis                                               T-score ≤ −2.5
                                                                                      (फ्रैक्चर  बहुत ही आसानी से हो जाता  है )                                                                                     
2) Quantitive Computed Tomography :



   इसके द्वारा bonedensity  का पता लगाया जाता है। 



3) Biochemical Test :



Chemical Biomarkers हड्डियों की health विषय में जानने में मदद करते हैं।  







ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज़ (Treatment Of Osteoporosis In Hindi):




Osteoporosis के उपचार के मुख्य लक्ष्यों की यदि बात की जाये तो वो इस प्रकार हैं :

*ओस्टियोपोरोसिस के विकास को धीमा करना या रोकना। 

*स्वस्थ हड्डी खनिज घनत्व और हड्डी द्रव्यमान/bone mass density 
 को बनाए रखना। 

*फ्रैक्चर/ हड्डी टूटने के खतरे को रोकना 

*शरीर में होने वाले दर्द को कम करना। 

*व्यक्ति की अपने दैनिक जीवन के सभी कार्यों को जारी रखने की क्षमता को अधिकतम स्तर पर बनाये रखना।

ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज़ के यह सभी लक्ष्य एक स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली के साथ कुछ दवाओं के उपयोग के माध्यम से हासिल किया जा सकते हैं ।


1) जीवनशैली में परिवर्तिन:

Osteoporosis का पता चलने के बाद डॉक्टर मरीज़ को अपनी जीवनशैली में परिवर्तन करने  की सलाह देते हैं। 
जिनमे मुख्य रूप से संतुलित भोजन और व्यायाम को अपने नित्य जीवन में अपनाना सबसे अहम् और कारगर पाया गया है।


i) संतुलित भोजन का सेवन  :

यह बहुत ही आवश्यक है की मरीज़ ऐसा भोजन ले जो कैल्शियम/Calcium, विटामिन D/ Vitamin D और प्रोटीन युक्त हो।
  
Calcium:



ऐसा भोजन जो कि Calcium से भरपूर हो जैसे कि दूध, दही, पनीर, घी, आदि का सेवन बहुत ही जरुरी 

 होता है। 

हर आयु वर्ग अर्थात बच्चे और वयस्कों में औरहर लिंग अर्थात महिला और पुरषों में अलग-अलग मात्रा में कैल्शियम की आपूर्ति की जरुरत होती हैं।


  • बच्चों  में प्रतिदिन 800 mg /day,
  • महिलाओं में लगभग 1200 mg /day और 
  • पुरषों में 1000 mg/day तक की कैल्शियम की
मात्रा की आवश्यकता होती है।

गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं में यह आवश्यकता बढ़ जाती है।
इनमें कम से कम 1500mg/ day की आपूर्ति होने चाहिए।

50 वर्ष की उम्र के बाद पुरषों और महिलाओं को अधिक कैल्शियम का सेवन करना चाहिये।

Calcium की कमी होने होने पर डॉक्टर की सलाह पर Calcium की गोली के सेवन द्वारा इसकी कमी 
को पूरा किया जा सकता है।


Vitamin D:



हमारे शरीर में calcium के अवशोषण के लिए Vitamin D की आवश्यकता होती है।

       
Vitamin D की आपूर्ति त्वचा द्वारा सुबह की धुप के अवशोषण से और भोजन के माध्यम से
 होती है।


  • बच्चों में 400 iu /day , 
  • बड़ों में/वयस्कों में 600 iu/day और
  • बुजुर्गों में 800 iu /day की आवश्यकता होती है।

यदि vitamin d की कमी हो जाये तो इसको भी viatmin suppliments की मदद से पूरा किया जा सकता है।   
  

ii) व्यायाम :    

 प्रतिदिन योग-व्यायाम करना ,घूमना, टहलना हमारी शरीर के हड्डियों को मजबूत बनाने और उसक 
 घनत्व को बढ़ाने में बहुत ही मददगार होते हैं।

शुरू से ही जो लोग एक्सरसाइज या व्यायाम करते हैं उनमें हड्डियां काफी समय तक मजबूत रहती हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस हो जाने के बाद बहुत ज्यादा भारी या वजन वाले व्यायाम करने से  बचे और डॉक्टर की सलाह पर ही कोई भी exrecise करना शुरू करें।
   

2)  दवाइयों का प्रयोग :


Osteoporosis की बीमारी के पता चलने के बाद आपका डॉक्टर आपको  ऐसी दवाईयाँ लेने की सलाह देगा जो इस बीमारी को बढ़ने से रोकने और उपचार में मददगार सिद्ध होती हैं। 

कुछ बिमारियों के कारण जैसे कि thyrotoxicasis आदि या फिर महिलायों में यदि हॉर्मोन की कमी या मासिक धर्म बंद होने के कारण यह स्तिथि पैदा हुई हो तो ऐसे में Hormone Replacement Therapy (HRT) द्वारा इसका इलाज़ किया जाता है। 

आइये कुछ दवाइयां जो की osteoporosis में प्रयोग लायी जाती हैं उनके बारे में जान लेते हैं :



1)Bisphosphonates:



- यह दवाइयां बहुत ही अहम भूमिका निभाती हैं 

  osteoporosis के बचाव और उपचार में। 

- यह दवा Antiresorptive drug होती है जो कि
  हड्डियों के अवशोषण / resorption को रोकने 
   का काम करती है। 

- यह दवा resorption दर को कम करके हड्डी के 
  टूटने /fracture के खतरे को कम करने में 
   सहायता करती है। 

- एक बात का विशेष ध्यान रखें कि अपने doctor
  की सलाह पर ही इस दवा का सेवन करें।  




2)Hormone Replacement Therapy
   (HRT):.




 * Estrogen Therapy: 

महिलाओं में रजोनिवृति/मासिक धर्म बंद होने के बाद ओस्टेओपोरोसिस से पीड़ित मरीज़ में हड्डी के टूटने के खतरे को कम करने के लिए Estrogen Therapy भी दी जाती है। 

परन्तु Estrogen Therapy के कई side-effects होते हैं जैसे कि वजन बढ़ना/ Weight gain, 
बी.पी/Hypertension, खून के थक्के बनना/Thrombus,ब्रेस्ट कैंसर /Breast Cancer,
 ह्रदय रोग/ Heart Diseases आदि। 

इसलिए Estrogen Therapy डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लिया जाना चाहिए।   





 *Testosterone Replacement Therapy:

पुरषों में कम testosterone बनने से पाए जाने लक्ष्णों करने में इस hormone replacement therapy से यक़ीनन काफी मदद मिलती है। 

परन्तु ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित पुरष मरीज़ोंमें दवा से ही बहुत अच्छा असर देखने को मिलता
है। 

   
* Raloxifene:

Raloxifene (Evista)पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में हड्डी घनत्व /bone density पर Estrogen/ एस्ट्रोजेन के फायदेमंद प्रभाव की भाँति अपना प्रभाव दिखाता है।

परन्तु यह Estrogen से आम तौर  पर होने वाले complications से रहित पाया गया है। 

Raloxifene दवा को लेना कुछ प्रकार के स्तन कैंसर के खतरे को भी कम कर सकता है। 

Hot flushes का  होना इसका आम दुष्प्रभाव होता है।

Raloxifene भी रक्त के थक्के /blood clot का खतरा बढ़ा सकता है।





ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव (Precautions In Osteoporosis In Hindi):


कम उम्र या बचपन से ही हड्डियों को मजबूत बनाये रखने के लिए सचेत रहना सबसे अहम् कदम है बढ़ती उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस/osteoporosis के खतरे को कम करने की दिशा में। 



Osteoporosis से बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है जैसे कि :


*संतुलित भोजन लें 



*Calcium और Vitamin D की सही मात्रा का सेवन करें 



*Exercise करें /वजन उठाने वाली एक्सरसाइज भी करें 



*व्यसनों से दूर रहें (सिगरेट ,शराब आदि )



*समय समय पर डॉक्टर से जांच कराएं यदि घर में Osteoporosis की history रही हो तो । 



Diet Good For Osteoporotic Patients in Hindi:


*कैल्शियम और विटामिन D युक्त पौश्टिक भोजन लें।
  डेरी उत्पाद जैसे कि दूध, दही, पनीर, घी आदि 
  calcium से भरपूर होतें हैं, इनका सेवन अवश्य  करें। 

*हरी और पत्तेदार सब्जियाँ का सेवन करें।

*फल और मेवों जैसे कि बादाम,अखरोट,आदि को 
  अपने भोजन में जरूर शामिल करें।

*Protein की उचित मात्रा के सेवन पर ध्यान दें।



Food To Be Avoided in Osteoporosis in Hindi :


*Junk Food जैसे  कि पिज़्जा,बर्गर,फ्रेंच फ्राइज 
   आदि से परहेज़ करें या कभी-कभार ही लें।

*Processed Food लेने से बचें। 



*Canned Food / डिब्बाबंद खाने का प्रयोग 

कम करें या न करें।

*Soda और cold drinks का सेवन न करें।





तो देखा आपने Osteoporosis एक Silent Killer Disease की भाँती शुरुवाती दिनों में बिना किसी symptoms के दिखे हमारी bones को इतना कमजोर बना देती है कि इसका पता है रोगी को जब हलके से झटके से ही bone fracture हो जाता है



इसलिए समय रहते इसके कारणों को समझे और अपनी lifestyle में बदलाव लाकर इस बिमारी से बचें और यदि आप इसकी चपेट में आ ही चुके हैं तो सही इलाज़ और देखभाल से अपने को Osteoporosis के Complications से बचाएँ ।   



यदि आपको-"Osteoporosis-Causes, Symptoms, Prevention, and Treatment" जानकारी अच्छी लगी तो इसे share करना न भूलें ...... 



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